शब्दांकुर प्रकाशन

Corona kaal : jeevan samar by Dr. Munnalal Prasad

ISBN -

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Language -

Edition -

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Publication Date -

Hours To Read -

Pages -

Total Words -

978-81-19686-46-9

Reality

Nature

Hindi

1st

98.0 MB

2024

-

212

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ABOUT BOOK

डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद द्वारा लिखित ‘कोरोना काल: जीवन समर’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील साहित्यिक कृति है, जो केवल कोरोना महामारी के दौर का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि उस समय के भीतर छिपी मानवीय जिजीविषा, सामाजिक असमानता, पारिवारिक द्वंद्व और मानसिक संघर्षों की गहन पड़ताल भी है। यह पुस्तक उस समय को चित्रित करती है जब पूरी दुनिया एक अदृश्य वायरस से भयभीत होकर ठहर गई थी,  उन्होंने यह दिखाया है कि कैसे महामारी ने हमारे पारिवारिक ढांचे को झकझोरा — एक ओर जहां लोग घरों में बंद होकर एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता रहे थे, वहीं भावनात्मक दूरी भी बढ़ रही थी। प्रवासी मजदूरों की त्रासदी, ऑक्सीजन की किल्लत, श्मशानों की भीड़, इलाज के लिए भटकते लोग और अपनों को खोने की पीड़ा — ये सब घटनाएं लेखक ने इस पुस्तक में अत्यंत सजीवता से व्यक्त की हैं। 

ABOUT AUTHOR

11 अक्टूबर 1962 को बिहार के सिवान जिले में जन्मे डॉ. मुन्ना लाल हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं—कविता, कहानी, गीत, नाटक और आलोचना—में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। “जगा फिर एक बार”, “आदमी कभी नहीं मरता”, “कफ्र्यू” और “उम्मीद की किरण” जैसी रचनाएँ उनकी सृजनात्मक क्षमता का प्रमाण हैं। अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं, साथ ही वे कई साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े रहे हैं। मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य अकादमी गौरव सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित, डॉ. मुन्ना लाल की नवीन कृति “कोरोना काल : जीवन समर” महामारी के दौर के संघर्ष, संवेदनाओं और मानवता के जिजीविषा भरे स्वर का सशक्त दस्तावेज है।

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