शब्दांकुर प्रकाशन

Shabdankur Blog

पुस्तक समीक्षा – क्रंदन

पुस्तक : क्रंदन रचनाकार : कल्पना शुक्ला त्रिवेदीक समीक्षक : संध्या प्रह्लाद जब हम किसी स्नेहिल के विषय में कुछ लिखते हैं तो सत्य और सम्पूर्ण न्याय कहीं न कहीं बाधित होते हैं। हमारा स्नेह उसके पक्ष में परिलक्षित होता है। कल्पना से अगाध स्नेह होने के कारण मुझे क्रंदन के बारे में कुछ भी …

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तुलना करने से बचें

ईश्वर ने जब हमें बनाया तो हर व्यक्ति को एक ऐसी विशेषता से समृद्ध किया जो हमें लाखों की भीड़ में भी सबसे अलग खड़ा कर सके। पर हम ठहरे साधारण मनुष्य, हमें दिखता ही वही है जो हमारे पास नहीं है और हमें भाता वही है जो हम हो नहीं सकते। अपनी एक अच्छाई …

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लघुकथा – वर्तमान का दंश

“और हिरो ! क्या चल रहा है  लाइफ में ?” कईं सालों बाद मुम्बई से दिल्ली अपने छोटे भाई के घर आए रमानाथ जी ने अपने सत्रह साल के भतीजे से पूछा।“कुछ खास नही ताऊजी , बस आई-आई-टी की तैयारी कर रहा हूँ ।”“अरे पढ़ाई वढ़ाई तो चलती रहती है। तू तो ये बता तेरी गर्लफ्रैंडस …

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मोहनिशा

तेज तर्रार हैंडसम मोहन पाकिस्तानी हिन्दू था और बला की खूबसूरत जेबुन्निसा हिंदुस्तानी  मुस्लिम। कैम्ब्रिज कॉलेज में पढ़ते-पढ़ते दोनों को एक-दूसरे से प्रेम हो गया। वहीं दोनों ने  लंदन की बड़ी कम्पनी में नौकरी करते-करते एक दिन विवाह करने की ठान ली। दोनों के घरवालों उनका फैसला सुनकर बिफर गये। आखिर में  बच्चों की जिद के सामने दोनों …

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डिप्रेशन की व्यापकता

 दुनिया भर में हर साल सभी आयु वर्गों के लगभग 32  करोड़ लोग डिप्रेशन से पीड़ित होते हैं जो कि सभी बीमारियों से पीड़ित लोगों के 4.3 % हैं. लेकिन इनमें  अधिकांश पीड़ित यह मानते ही नहीं कि वे डिप्रेशन या किसी मानसिक रोग से पीड़ित हैं.  इसी लिए बहुत कम पीड़ित लोग चिकित्सा सहायता …

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डिप्रेशन संबधित परिभाषा एवं धारणाएं

डिप्रेशन को आधुनिक समाज की बीमारी माना जाता है, क्योंकि जीवन चर्या में बदलाव, प्रतियोगिता का माहौल, सामाजिक माध्यमों का उपयोग, भावनाएं, महत्वाकांक्षाएँ और उम्मीदें हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर हावी हो चुके हैं. जो मनुष्य पहले शिकारियों के रूप में  और खाने पीने की चीजें जंगलों में बटोरने में जीवन बिताता था,पिछले लगभग 3000 वर्षों …

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