शब्दांकुर प्रकाशन

Ganga me terte mitti ke diye by Dr. Rama Dwivedi

ISBN -

Subject -

Genre -

Language -

Edition -

File Size -

Publication Date -

Hours To Read -

Pages -

Total Words -

978-93-49612-56-3

हाइकु - तांका - सेदोको संग्रह

Nature

Hindi

1st

14.5 MB

2025

---

137

----

ABOUT BOOK

डॉ. रमा द्विवेदी द्वारा हाइकु, तांका और सेदोका कविताओं के मनोरम संग्रह ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दिए’ के ​​माध्यम से आध्यात्मिक और काव्यात्मक यात्रा में डूब जाइए। यह हिंदी साहित्यिक कृति पवित्र गंगा के किनारे भक्ति और परंपरा के सार को खूबसूरती से दर्शाती है। यह पुस्तक तीन विशिष्ट जापानी काव्य रूपों – हाइकु की संक्षिप्तता, तांका की भावनात्मक गहराई और सेदोका की अनूठी लय – को एक साथ पिरोकर पवित्र नदी पर तैरते मिट्टी के दीयों की विशद कल्पना को चित्रित करती है। इन सावधानीपूर्वक तैयार किए गए छंदों के माध्यम से, पाठक आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सुंदरता के मंत्रमुग्ध कर देने वाले मिश्रण का अनुभव कर सकते हैं जो गंगा के घाटों की विशेषता है। यह संग्रह एक सांस्कृतिक सेतु और ध्यानपूर्ण अन्वेषण दोनों का काम करता है, जो इसे किसी भी कविता प्रेमी के पुस्तकालय के लिए एक मूल्यवान वस्तु बनाता है। समकालीन हिंदी साहित्य के प्रेमियों और पूर्वी काव्य परंपराओं के सम्मिश्रण में रुचि रखने वालों के लिए एकदम सही।

ABOUT AUTHOR

डॉ. रमा द्विवेदी का जन्म 1 जुलाई 1953, ग्राम-पाटनपुर, जिला हमीरपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। विवाह कृषि वैज्ञानिक डॉ एस एल द्विवेदी के साथ हुआ । 16 वर्षों तक स्थानीय कॉलेज, हैदराबाद में हिंदी अध्यापन एवं स्वैच्क्षिक अवकाश। वे हिंदी में पी एच डी, एम् फिल, एम ए हैं। उनकी पुस्तकें- दे दो आकाश (2005, काव्यसंग्रह), रेत का समंदर (2010, काव्यसंग्रह) तथा साँसों की सरगम (2013, हाइकु संग्रह) प्रकाशित हो चुकी हैं तथा ‘दे दो आकाश’ एवं ‘रेत का समंदर’ का ई बुक संस्करण भी प्रकाशित हो चुका है। ‘भाव कलश’ ताँका संकलन में ताँका संकलित (संपादन- रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, डॉ भावना कुँवर), ‘यादों के पाखी’ हाइकु संकलन में हाइकु संकलित (संपादन- रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, डॉ .भावना कुंवर, डॉ हरदीप संधु), ‘आधी आबादी का आकाश’ हाइकु संकलन में हाइकु संकलित, (संपादन- डॉ अनीता कपूर), ‘शब्दों के अरण्य में’ संकलन में उनकी कविताएँ संकलित हुई हैं। ‘हिन्दी हाइगा’, ‘सरस्वती सुमन’, ‘अभिनव इमरोज’ , ‘सीपियों में सागर’, ‘मधुमालिका’, ‘हाइकु -2019’ में भी उनकी अनेक रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।विश्वगाथा , सृजनलोक, कादम्बिनी, संकल्य, सार्थक नव्या में रचनाएं प्रकाशित एवं कविता कोश तथा अनेक स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। 14 वर्षों तक ‘पुष्पक’ साहित्यिक पत्रिका की सम्पादक रह चुकी हैं। डॉ आशा मिश्रा के द्वारा ‘पुष्पक’ पत्रिका के 25 अंकों पर एम फिल की डिग्री हेतु शोध कार्य संपन्न हुआ है। वे गीत, छंदबद्य कविता, मुक्तक, क्षणिका, कुंडलियां, घनाक्षरी, दोहे, हाइकु, कहानी, लघुकथा, समीक्षा आदि विधाओं में लेखन करती हैं। उन्हें साहित्य गरिमा पुरस्कार, महादेवी वर्मा श्रेष्ठ सम्मान, भाषा रत्न सम्मान, परिकल्पना सम्मान जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। उनकी एक कहानी ‘खंडित यक्षिणी’ का मंडी थियेटर, शिकागो द्वारा मंचन भी किया गया है। उनकी रचनाओं का आनंद लेने के लिए kavitakosh:www.kavitakosh.org/ramadwivedi और http://ramadwivedi.wordpress.com (अनुभूति कलश) जैसी वेबसाइट को भी देखा जा सकता है।

VIDEOS

शेयर करें
5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
Register!
Menu