ISBN -
Subject -
Genre -
Language -
Edition -
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Publication Date -
Hours To Read -
Pages -
Total Words -
978-93-91546-15-1
Poems
Nature
Hindi
1st
27 MB
February 2022
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128
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ABOUT BOOK
“प्रीत के द्वार पर” पुस्तक के सभी गीत प्रीत के द्वार पर खड़े होकर माथा टेक रहे हैं l जो प्रेम में डूबे हुए व्यक्ति की विभिन्न भावनाओं को सीधे सरल शब्द प्रदान करती है l व्यक्ति जब प्रेम में डूबकर जिस प्रेम रुपी उपवन का आनंद लेता है उस उपवन रुपी “प्रीत के द्वार पर” खड़े होकर लेखक दुर्गेश अवस्थी ‘आँचल’ यह बताना चाहते हैं कि सांसारिक विषमताओं को त्यागकर प्रेम में डूबकर आनंदमयी जीवन कितना सुहाना हो जाता है l







